अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दे दिया है। कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टैरिफ को लागू करने के ट्रंप के तरीके गलत हैं। कोर्ट ने कहा है कि इमरजेंसी पावर्स का इस्तेमाल करके ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए, वो गैरकानूनी थे। बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। आइए जानते हैं कोर्ट के इस फैसले के बारे में विस्तार से।
दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक आपातकालीन शक्ति कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर केंद्रित है। इसमें करीब हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक पारस्परिक यानी रेसिप्रोकल टैरिफ भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को खारिज कर दिया है। बता दें कि अप्रैल 2025 में व्यापार घाटे की आपात स्थिति से निपटने के लिए ट्रंप द्वारा अन्य देशों पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ के खिलाफ 6-3 से फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस फैसले में आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को टारगेट किया है और 1977 के आपातकालीन शक्तियों के कानून के माध्यम से लगाए गए टैरिफ को अमान्य करार दिया है। बता दें कि इस फैसले से असहमति जताने वाले 3 जजों सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कवनुघ ने कार्यपालिका (राष्ट्रपति) को फैसले लेने में फ्लेक्सिबिलिटी यानी लचीलापन दिए जाने का तर्क दिया।
हालांकि, कोर्ट के अन्य जजों ने बहुमत से इस बात को पाया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए जिस कानून का सहारा लिया, उन्होंने उस कानून की व्याख्या उसके मूल मकसद से परे जाकर की। कोर्ट ने कहा कि उस कानून में इम्पोर्ट टैक्स को लगाने के लिए साफ तौर पर अनुमति नहीं दी गई थी। भले ही उस कानून का इस्तेमाल पूर्व में प्रतिबंध लगाने के लिए किया गया हो।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा है कि टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस यानी संसद के पास है। वहीं, राष्ट्रपति के पास इमरजेंसी टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रंप द्वारा टैरिफ लगाने से जुड़े सभी एग्जीक्यूटिव यानी कार्यकारी आदेशों को खारिज कर दिया है।
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकॉनमिक पावर्स एक्ट के तहत टैरिफ लगा रहे थे और सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आने से पहले वो लगातार ये कह रहे थे कि ये केस अमेरिका की किस्मत तय करेगा.। ट्रंप ने ये भी कहा था कि अगर कोर्ट का फ़ैसला उनके खिलाफ आया तो वो कोई और रास्ता निकाल लेंगे। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप टैरिफ लगाने के लिए कौन सा नया फॉर्मूला निकालते हैं।
कोर्ट में मामला जाने पर ट्रंप ने कहा था कि उनके खिलाफ यह फैसला आने से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान होगा। फैसला आने के समय ट्रंप दोनों पार्टियों यानी कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के करीब 24 गवर्नरों से व्यक्तिगत बैठक कर रहे थे। जब उन्हें इस फैसले की खबर दी गई, तो ट्रंप ने बहुमत के इस फैसले को 'शर्मनाक' बताया। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि आम लोगों में ये टैरिफ ज्यादा पसंद नहीं किए जा रहे थे। दरअसल, आम लोगों का मानना था कि टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ रही है और जीवन-यापन की लागत ज्यादा हो गई है।
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